ओशो का जीवन परिचय | Osho Biography in Hindi
ओशो एक ऐसे आध्यात्मिक गुरू रहे हैं, जिन्होंने ध्यान की अतिमहत्वपूर्ण विधियाँ दी। ओशो के चाहने वाले पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। इन्होंने ध्यान की कई विधियों के बारे बताया तथा ध्यान की शक्ति का अहसास करवाया है।
हमें ध्यान क्यों करना चाहिए? ध्यान क्या है और ध्यान को कैसे किया जाता है। इनके बारे में ओशो ने अपने विचारों में विस्तार से बताया है। इनकी कई बार मंच पर निंदा भी हुई लेकिन इनके खुले विचारों से इनको लाखों शिष्य भी मिले। इनके निधन के 30 वर्षों के बाद भी इनका साहित्य लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है।
ओशो की जीवनी एक नजर में
नाम | आचार्य रजनीश, ओशो |
वास्तविक नाम | रजनीश चन्द्रमोहन जैन |
जन्म और जन्मस्थान | 11 दिसम्बर 1931, कुचवाड़ा (मध्यप्रदेश) |
पिता का नाम | बाबूलाल जैन |
माता का नाम | सरस्वती जैन |
कार्यक्षेत्र | आध्यात्मिक गुरू |
निधन | 19 जनवरी 1990, पुणे (महाराष्ट्र) |
निधन का कारण | कंजेस्टिव हार्ट फैल्योर |
ओशो से पूर्व लोगों ने बहुत से संतों, मनोवैज्ञानिकों, दार्शनिकों आदि को पढ़ा या सुना होगा, लेकिन ओशो ने उनके संदेशों के वास्तविक अर्थों को समझाया। ओशो ने सही अर्थों में इस जगत को मनुष्यता का नया अर्थ दिया, कैसे इस बोझपूर्ण जीवन को बोधपूर्ण बनाया जाए इसकी नई सीख दी।
सदियों से चली आ रही रूढिवादी सोच और मान्यताओं को नया अर्थ देने का काम ओशो द्वारा ही किया गया तथा धर्म को नई परिभाषा दी। ओशो ने सिखाया कि कैसे बाहर और भीतर के जगत के साथ तालमेल बैठाकर जीवन को सुंदर बनाया जा सकता है।
ओशो (osho hindi) ने ऐसी ध्यान की विधियों से परिचय करवाया जिससे मनुष्य अपने अंतस की गहराइयों में पहुँचकर जीवन के अर्थों को समझ सके। ओशो ने हमेशा जोर दिया कि जीवन जैसा हैं उसे वैसा ही स्वीकार करो, इसे बदलने की चेष्टा मत करो। परिस्थतियों को बदलने और उससे भागने की बजाय ओशो ने सिखाया कि कैसे इन सबसे प्रति जागरूक होकर इससे परे हुआ जा सकता है।
ओशो अपने पीछे साहित्य का इतना बड़ा भंडार छोड़कर गये हैं कि आप कुछ भी पढ़ो आपको लगेगा कि ओशो इसके बारे में पहले ही बता चुके हैं। ओशो को सुनने और पढ़ने पर आपको ऐसा लगता हैं कि जैसे ओशो ने यह मेरे लिए ही बोला है।
ओशो किसी भी पुरानी परम्परा का हिस्सा नहीं, ओशो से एक नए युग का आरम्भ होता है, ओशो पूरब और पश्चिम के बीच का सेतु है। ओशो द्वारा एक नई मनुष्यता का जन्म हुआ है जो अतीत की धारणाओं से पूर्णतया मुक्त है।
ओशो का जन्म और शिक्षा (Osho Life Story Hindi)
ओशो का जन्म 11 दिसम्बर 1931 को मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव कुचवाड़ा (Osho Birth Place) में हुआ। ओशो का पूरा नाम व बचपन का नाम “रजनीश चन्द्रमोहन जैन” (Rajneesh Chandra Mohan Jain) था। ओशो के जन्म के समय एक विचित्र घटना घटी, कहते हैं कि ओशो जन्म के तीन दिनों तक न तो रोये और न अपनी माता का दूध पिया इससे उनके घरवाले चिंतित हो उठे।
इसके बाद ओशो (osho life story hindi) के नाना जो ओशो के काफी करीब रहे उन्होंने ओशो की माँ को समझाया की तुम नहाओ और इसके बाद इसे दुसरे कमरे में लेकर जाओ वो तुम्हारा दूध पिएगा और वाकई में ऐसा ही हुआ। इससे ओशो के नाना और ओशो की माँ को अंदाजा हो गया था कि उनके यहाँ पैदा हुआ बच्चा कोई साधारण बच्चा नहीं है।
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